Wednesday, April 21, 2021
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फिर बना एक रिकॉर्ड, दिल्ली में नौ साल में सबसे गर्म रहा 14 फरवरी

कई दिन से तापमान में लगातार इजाफा हो रहा है। रविवार को वेलेंटाइन-डे नौ साल में सबसे गर्म रहा। अधिकतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस को पार कर गया। इससे एक दिन पहले ही गर्मी ने पांच साल का रिकॉर्ड तोड़ा था। मौसम विशेषज्ञों का अनुमान है कि सोमवार सुबह हल्के से मध्यम श्रेणी का कोहरा रह सकता है और दिन में सूरज की तपिश महसूस होगी।

 

मौसम विभाग के मुताबिक, कमजोर पड़े पश्चिमी विक्षोभ की वजह से दिन-रात के तापमान में अधिक अंतर दर्ज किया जा रहा है। यही वजह है कि दिन अधिक गर्म और रातें सर्द हो रही हैं। इस सप्ताह भी परिस्थितियों में खास बदलाव की उम्मीद कम है। इसके बाद लगातार दिन के तापमान में बढ़ोतरी दर्ज होने की आशंका है।

प्रादेशिक मौसम विभाग के अनुसार, रविवार को राजधानी का न्यूनतम तापमान सामान्य से दो कम 8.6 व अधिकतम तापमान सामान्य से पांच अधिक 28.7 डिग्री सेल्सियस डिग्री रहा। साल 2012 में यह 28 डिग्री दर्ज किया गया था। पिछले 24 घंटों में हवा में नमी का अधिकतम स्तर 100 व न्यूनतम स्तर 42 फीसदी रहा। इस वजह से अलसुबह दिल्ली के विभिन्न इलाकों में कोहरा रहा। स्पोर्ट्स कांप्लेक्स में अधिकतम तापमान 29.2 डिग्री दर्ज किया गया।

गंभीर श्रेणी में पहुंची तीन शहरों की हवा
मौसमी परिस्थितियों में हो रहे उतार-चढ़ाव का असर वायु गुणवत्ता पर भी पड़ रहा है। दिल्ली की हवा लगातार बहुत खराब श्रेणी में बनी हुई है। वहीं, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा व नोएडा में हवा गंभीर श्रेणी में पहुंच गई है। इससे एक दिन पहले केवल गाजियाबाद की हवा ही गंभीर श्रेणी में थी। गुरुग्राम में 288 एक्यूआई के साथ हवा का स्तर खराब श्रेणी में रहा। सोमवार को भी हवा की गुणवत्ता यथावत रहेगी।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के अनुसार, रविवार को राजधानी का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक 351 रहा। गाजियाबाद 416, ग्रेटर नोएडा 402 और नोएडा 416 रहा। इसके अलावा फरीदाबाद 366 के साथ बहुत खराब श्रेणी में रहा।

कई दिनों से मौसम में तापमान की बढ़ोतरी हो रही है। दिल्ली में रविवार के दिन साल 9 साल का सबसे गर्म दिन रहा है। वैलेंटाइन डे यानी कि रविवार के दिन दिल्ली में दर्ज किए तापमान से पता चला है कि अधिकतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस की लाइन को पार कर गया है। दिल्ली के तापमान ने इससे एक दिन पहले और 5 सालों का रिकॉर्ड तोड़ा था। मौसम विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस सीजन में बहुत भयानक गर्मी हो सकती है। इसके अलावा और भी कई रिकॉर्ड टूट सकते हैं।

जानिए आपके लिए क्या है खास?

मौसम विभाग के अनुसार पश्चिमी विक्षोभ में कमी आने के कारण से दिन रात के तापमान में अधिक फर्क नजर आ रहा है। इसी कारण से दिल्ली के मौसम में भी काफी ज्यादा परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। आने वाले कुछ दिनों में मौसम में काफी ज्यादा बदलाव देखने को मिल सकते हैं। एक-दो दिन में तापमान में और ज्यादा बढ़ोतरी हो सकती है।

रविवार के दिन देश की राजधानी का न्यूनतम तापमान सामान्य से 8.6 डिग्री सेल्सियस था। पूरे देश में लगभग पश्चिमी विक्षोभ का असर देखने को मिल रहा है। साल 2012 में इसी दिन 28 डिग्री तापमान दर्ज किया गया था। रविवार के दिन सुबह के मौसम में काफी नमी और कोहरा छाया हुआ था। 

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मौसम में अचानक उतार चढ़ाव आने से वायु की गुणवत्ता में भी काफी असर देखने को मिल रहा है दिल्ली की हवा निरंतर खराब स्तर की ओर बढ़ रही है। दिल्ली के अलावा गाजियाबाद ग्रेटर नोएडा नोएडा में भी हवा की गुणवत्ता बहुत ज्यादा खराब है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार रविवार को दिल्ली की वायु का गुणवत्ता सूचकांक 351 था वही गाजियाबाद का 416 व ग्रेटर नोएडा का 402 और नोएडा का 416 था।

अभी से गर्मी का कहर दिखाई दे रहा है, मार्च मे मौसम का तापमान औसतन 33.1 डिग्री सेल्सियस के लगभग दिखाई दिया, जो साधारण तापमान से अधिक मौसम विभाग ने बताया, लगभग बहुत सालो बाद इस महीने को सबसे अधिक गर्म बताया जा रहा हैं। मध्यप्रदेश में 3 अप्रैल को लू चलने की संभावना बताई गए है। दिल्ली में गर्मी का असर ज्यादा दिखाई दिया,मार्च के महीने को दिल्ली में 76 साल के बाद सबसे गर्म महीना बताया गया।

इस मौसम के परिवर्तन की वजह से कोरोना का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। इससे लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ रहा है। 2020 में भी गर्मी का कहर ज्यादा ज्यादा दिखाई दिया। 

जलवायु परिवर्तन की वजह से धरती के तापमान मे बढ़ोतरी हो रही है। इसी वजह से मौसम पर भी असर दिख रहा हैं,  मौसम परिवर्तन के चलते लोग बीमार हो रहे हैं। इसके लिए हमे ग्रीन हाउस गैस की बढ़ोतरी को कम करना होगा, यह हमारे स्वास्थ्य तथा धरती के तापमान के नियंत्रण के लिए जरूरी हैं।

क्लाइमेट रिस्क इंडेक्स मे बताया गया है, कि इस इंडेक्स मे भारत की रैंक 20 नंबर पर है, इसका मतलब अधिक जोखिम वाले देशों मे भारत का नाम है।

क्लाइमेट चेंज भी प्राकृतिक आपदाओं के लिए होता है जिम्मेदार

आपको जानकारी के लिए बता दें कि क्लाइमेट चेंज प्राकृतिक आपदाओं का सीधे जिम्मेदार होता है। मौसम में जो भी परिवर्तन देखने को मिलता है इसकी वजह से धरती पर कई बड़ी प्राकृतिक होती हैं जैसे कि बाढ़ या सुखा-अकाल।

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